उन्नाव में गैस एजेंसी का बड़ा खेल: बुकिंग के बावजूद नहीं मिला सिलेंडर, मोबाइल पर ‘डिलीवर’ का झूठा मैसेज — उपभोक्ताओं में आक्रोश

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निखिल वर्मा
समन्वयक सिद्धी टुडे

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी गैस वितरण व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि Indian Oil Corporation की इंडेन गैस एजेंसी के नाम पर संचालित एक गैस एजेंसी में खुलेआम धांधली और कालाबाज़ारी का खेल चल रहा है।

घटना का पूरा क्रम: पीड़ित उपभोक्ता के अनुसार, उसने 13 मार्च 2026 को मोबाइल के माध्यम से गैस सिलेंडर बुक कराया था। बुकिंग के बाद लगातार कई दिनों तक वह एजेंसी के चक्कर लगाता रहा, लेकिन हर बार उसे टाल दिया गया। कभी स्टॉक खत्म होने का बहाना, तो कभी “कल आना” कहकर वापस भेज दिया गया।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 23 मार्च 2026 को उपभोक्ता के मोबाइल पर अचानक एक मैसेज आता है कि उसका गैस सिलेंडर “सफलतापूर्वक डिलीवर” कर दिया गया है। जबकि हकीकत यह है कि उपभोक्ता को आज तक सिलेंडर मिला ही नहीं।

कालाबाज़ारी का शक गहरा: इस पूरे घटनाक्रम से यह आशंका जताई जा रही है कि एजेंसी के अंदर ही अंदर गैस सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग (कालाबाज़ारी) की जा रही है। उपभोक्ताओं के नाम पर बुकिंग दिखाकर, सिस्टम में फर्जी डिलीवरी दर्ज कर दी जाती है और वही सिलेंडर ऊंचे दामों पर खुले बाजार में बेच दिए जाते हैं।

उपभोक्ताओं का आरोप:

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि लंबे समय से यह गड़बड़ी चल रही है।

कई उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिलती, लेकिन रिकॉर्ड में डिलीवरी दिखा दी जाती है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ता है, बल्कि सरकार की सब्सिडी व्यवस्था का भी दुरुपयोग हो रहा है।

प्रशासन पर उठे सवाल: इतनी बड़ी अनियमितता के बावजूद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। अगर समय रहते जांच नहीं की गई, तो यह मामला और भी बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।

मांग उठी — हो सख्त कार्रवाई: पीड़ित उपभोक्ताओं ने मांग की है कि:
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
एजेंसी के रिकॉर्ड और डिलीवरी डेटा की ऑडिटिंग हो
दोषी पाए जाने पर एजेंसी का लाइसेंस रद्द किया जाए
उपभोक्ताओं को उनका हक दिलाया जाए

उन्नाव की यह घटना सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि यह पूरे देश में गैस वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती है। अगर ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आम जनता का भरोसा सरकारी व्यवस्थाओं से पूरी तरह उठ सकता है।