उन्नाव में प्रतिबंधित पेड़ों की कटान का विरोध करने पर पत्रकार पर हमला, माफिया की धमकी से मचा हड़कंप

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अनुज कुमार वर्मा
ब्यूरो –सिद्धि टुडे, उन्नाव

कैमरे में सच कैद करना पड़ा भारी, मोबाइल छीना, वीडियो डिलीट—पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार

जिले के अजगैन कोतवाली क्षेत्र के शीतल खेड़ा गांव से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां प्रतिबंधित महुआ व अन्य फलदार पेड़ों की अवैध कटाई का विरोध करने पहुंचे पत्रकार पर ही हमला कर दिया गया। इस घटना ने न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार, गांव में हरे-भरे और पुराने प्रतिबंधित पेड़ों को बिना किसी अनुमति के काटा जा रहा था। इसकी सूचना मिलने पर पत्रकार विमलेश चंद्र मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम को अपने कैमरे में कैद करने लगे।

बताया जा रहा है कि जैसे ही अवैध कटान का वीडियो रिकॉर्ड होने लगा, लकड़ी माफिया बौखला गए और उन्होंने पत्रकार पर हमला बोल दिया। इस दौरान उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया, रिकॉर्ड की गई वीडियो को जबरन डिलीट कर दिया गया और माइक को भी तोड़ दिया गया।

इतना ही नहीं, आरोपियों ने खुलेआम जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़ित के अनुसार, माफिया ने कहा कि अगर मामले की शिकायत की गई तो “एक्सीडेंट करवा दिया जाएगा।”

घटना के विरोध में पत्रकार विमलेश चंद्र ने करीब दो दर्जन से अधिक पत्रकारों के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

इस दौरान जर्नलिस्ट प्रेस क्लब उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सूरज कुमार मिश्रा ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पत्रकारों पर हमला किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में ठोस कदम उठाएगा या फिर यह गंभीर मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

पीड़ित पत्रकार
“मैं सिर्फ अपना काम कर रहा था, लेकिन माफिया ने मुझ पर हमला कर दिया, मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट कर दी और जान से मारने की धमकी दी।”

सूरज कुमार मिश्रा, अध्यक्ष
“पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस घटना के दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”

यह घटना सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि सच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा।