अनुज कुमार वर्मा
ब्यूरो – सिद्धि टुडे, उन्नाव
आज की शाम एक आम शाम नहीं थी। रोज़ की तरह जब मैं टहलने के लिए निकला, तो पुराना अस्पताल के पास बने पुल के नीचे एक ऐसा दृश्य मेरी आंखों के सामने आया, जिसने मन को भीतर तक झकझोर कर रख दिया। वहां दो छोटे-छोटे मासूम बच्चे ठंड से कांप रहे थे और उनके साथ एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठा था, जिसकी आंखों में बेबसी और चेहरे पर गहरी थकान साफ झलक रही थी। ठंड की मार और हालात की मजबूरी ने जैसे तीनों को एक ही कोने में सिमटने पर मजबूर कर दिया था।
मैं उनके पास गया और बातचीत की। शब्दों में जो पीड़ा उन्होंने बयां की, वह किसी भी संवेदनशील इंसान को विचलित करने के लिए काफी थी। उन्होंने बताया कि वे कई घंटों से भूखे हैं और ठंड से हालत खराब हो रही है। बच्चों के होंठ कांप रहे थे, शरीर सिहर रहा था, लेकिन आंखों में शिकायत नहीं थी—बस एक उम्मीद थी कि शायद कोई मदद कर दे।
बुजुर्ग व्यक्ति ने भारी मन से कहा— “भैया, बच्चे भूखे हैं और ठंड बहुत लग रही है।” यह सुनते ही मन व्याकुल हो उठा। बिना देर किए मैंने अपने सहयोगी ऋषभ कुमार और सुमित कुमार से संपर्क किया और तत्काल भोजन की व्यवस्था करवाई, ताकि कम से कम उनकी भूख शांत हो सके। बच्चों के चेहरे पर भोजन पाकर जो सुकून आया, वह क्षण भर के लिए राहत जरूर दे गया, लेकिन मन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो सका।
देर रात होने और संसाधनों की कमी के कारण मैं उस समय उन्हें ठंड से बचाने की पूरी व्यवस्था नहीं कर सका। यही बात मन में एक गहरी टीस बनकर रह गई। यह सोचकर मन भारी हो गया कि खुले आसमान पुल के नीचे, ठंडी रात वे कैसे गुजारेंगे। उसी क्षण मैंने स्वयं से यह संकल्प लिया कि उनकी अगली रात ठंड में नहीं गुजरने दूंगा।
इस घटना के माध्यम से मैं उन सभी समाजसेवी भाइयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सक्षम नागरिकों और प्रशासन से विनम्र अपील करता हूं कि कृपया ऐसे जरूरतमंद लोगों की ओर ध्यान दें। कंबल, गर्म कपड़े, अस्थायी आश्रय या थोड़ी-सी मदद किसी के लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है। समाजसेवा केवल नाम या पद से नहीं होती, बल्कि सही समय पर जरूरतमंद के लिए खड़े होने से होती है।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हमारे आसपास कोई भी मासूम भूखा न सोए, कोई बुजुर्ग ठंड से तड़पता न रहे। यदि हम थोड़ा-सा भी प्रयास करें, तो बहुत-सी ठंडी रातें किसी के लिए सुकून भरी बन सकती हैं।
मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है, और इसे जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।






























