प्रशांत तिवारी
सिद्धि संवाददाता –उन्नाव
मगरवारा–कानपुर–शुक्लागंज रोड पर डिवाइडर के बीचो-बीच लगा यूनिक पोल गिरना कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है।
सवाल यह है कि आखिर इतने दिन से यह खतरा लोगों की आंखों के सामने खड़ा था, फिर भी जिम्मेदारों ने आंखें क्यों मूंदे रखीं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई यूनिक पोल पहले से ही टेढ़े, ढीले और जर्जर हालत में खड़े थे। इसके बावजूद न तो किसी विभाग ने निरीक्षण किया और न ही समय रहते मरम्मत कराई गई। क्या हादसे का इंतजार किया जा रहा था?
डिवाइडर पर लगे ऐसे पोल सीधे चलते वाहनों के ऊपर खतरे की तरह खड़े रहते हैं। अगर यह पोल पीक ऑवर में गिरता, तो एक साथ कई वाहन इसकी चपेट में आ सकते थे। यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि प्रशासन की एक छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती थी।
नव प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है। आखिर नियमित सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं हुआ? किसके आदेश पर आंख मूंदकर काम पास कर दिया गया? और अब इस चूक की जिम्मेदारी कौन लेगा?
फिलहाल कोई जान नहीं गई, लेकिन यह सवाल ज़िंदा है—
जब खतरा दिख रहा था, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई? या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागता है?




























