पूर्व विधायक कुलदीप सिंह को जमानत, एवं रेप पीड़िता धरने पर

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अनुज कुमार वर्मा
ब्यूरो – सिद्धि टुडे, उन्नाव

पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को माननीय उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। न्यायालय द्वारा सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए जमानत प्रदान की गई है। कानूनी जानकारों के अनुसार, जमानत किसी भी आरोपी का संवैधानिक अधिकार है, जिसे दोषमुक्ति के रूप में नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत दी गई कानूनी राहत के रूप में देखा जाना चाहिए।

सेंगर के समर्थकों का कहना है कि वह लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहे और सुनवाई के दौरान अदालत ने यह पाया कि जमानत दिए जाने की परिस्थितियां बनती हैं। उच्च न्यायालय ने जमानत के साथ आवश्यक शर्तें भी लगाई हैं, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और गवाहों पर किसी प्रकार का दबाव न पड़े।

इसी बीच, कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप लगाने वाली महिला ने जमानत के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए दिल्ली के इंडिया गेट के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। धरने में महिला के साथ उसकी मां और महिला अधिकारों से जुड़ी कार्यकर्ता योगिता भयाना भी शामिल रहीं।

महिला का कहना है कि वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है और उसकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।

पूर्व विधायक के पक्ष से यह भी कहा गया है कि न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है और किसी भी प्रकार से कानून का उल्लंघन नहीं किया गया है। सेंगर के नजदीकी लोगों का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास है और वह कानूनी दायरे में रहकर ही आगे की प्रक्रिया का सामना करेंगे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जमानत मिलने के बाद किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है। जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक कानून की दृष्टि में आरोपी निर्दोष माना जाता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि प्रशासन को सभी पक्षों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निष्पक्ष रूप से कार्य करना चाहिए।
सेंगर के समर्थकों का कहना है कि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और ऐसे में सड़कों पर आरोप-प्रत्यारोप के बजाय न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि अंतिम निर्णय आने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।
पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के पक्ष से यह दोहराया गया है कि वह न्यायपालिका के प्रत्येक आदेश का सम्मान करते हैं और भविष्य में भी कानून के अनुसार ही अपनी बात रखेंगे।