सचिन कुमार
ब्यूरो- सिद्धि टुडे,उन्नाव
उन्नाव। देश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य तेजी से अंतिम चरण में पहुंच रहा है। कई हिस्सों में सड़क का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और परीक्षण के तौर पर वाहनों की आवाजाही भी देखी जा रही है। हालांकि एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि कई स्थानों पर सुरक्षा बैरियर, चेतावनी संकेतक, आपातकालीन सहायता केंद्र और सर्विस सुविधाएं अभी अधूरी हैं। कुछ जगहों पर निर्माण सामग्री भी सड़क किनारे रखी हुई दिखाई दी, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि एक्सप्रेसवे की उपयोगिता तभी सार्थक होगी जब सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार यातायात को देखते हुए क्रैश बैरियर, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, एम्बुलेंस सेवा और फायर सेफ्टी जैसी सुविधाएं अनिवार्य होती हैं। इन व्यवस्थाओं के बिना यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
निर्माण एजेंसियों का दावा है कि परियोजना के शेष कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं और सभी सुरक्षा मानकों को निर्धारित समय के भीतर लागू कर दिया जाएगा। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेसवे के संचालन से पहले सुरक्षा संबंधी सभी व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच की जाएगी।
गौरतलब है कि गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिससे आवागमन सुगम होने के साथ औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। लेकिन परियोजना के अंतिम चरण में सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवाल जिम्मेदार विभागों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
निष्कर्ष:
गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश के विकास की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि सभी सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह दुरुस्त होने के बाद ही इसका पूर्ण संचालन शुरू किया जाए। सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकती है।






























