अनुज कुमार वर्मा
ब्यूरो –सिद्धि टुडे, उन्नाव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भ्रष्टाचार और भूमाफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के दावे कर रहे हैं। प्रदेश भर में भूमाफिया और दबंगई करने वालों पर नकेल कसने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। लेकिन उन्नाव जिले के असोहा थाना क्षेत्र से सामने आया एक मामला पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां एक गरीब परिवार की पुश्तैनी जमीन पर दबंगई और गुंडागर्दी के बल पर कब्जा किया जा रहा है, जिसकी शिकायत पीड़ित परिवार द्वारा थाना, एसपी और डीएम तक की गई, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही न होना न्याय व्यवस्था की पोल खोल रहा है।
ग्राम चंदन खेड़ा माजरा हरनाम खेड़ा, तहसील पुरवा, जिला उन्नाव निवासी रंजन लाल, सज्जन लाल और विनोद कुमार पुत्र स्व. नन्हू ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर दबंग किस्म के लोग जबरन कब्जा कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने थाना असोहा में लिखित तहरीर दी थी, लेकिन आश्चर्य की बात है कि थाने के प्रभारी ने आज तक इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि विपक्षी राकेश कुमार सिंह पुत्र शिवनाथ सिंह निवासी ग्राम रानीपुर माजरा प्रिपरेशन, परगना बिजनौर, तहसील सरोजनी नगर, जिला लखनऊ, गुंडों के साथ मिलकर जमीन कब्जाने का प्रयास कर रहा है। विरोध करने पर पीड़ितों को धमकी दी जाती है और गांव में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने थाना स्तर से लेकर उच्चाधिकारियों तक गुहार लगाई। सज्जन लाल ने पुलिस अधीक्षक उन्नाव और जिला अधिकारी उन्नाव को भी लिखित रूप से सूचना दी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
गांव के लोगों का कहना है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण दबंगों के हौसले बुलंद हैं। अगर यही स्थिति रही तो विवाद और भी गंभीर रूप ले सकता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि प्रशासन की चुप्पी के चलते किसी बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मामले ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। सरकार की मंशा भूमाफियाओं पर शिकंजा कसने की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर थानों की लापरवाही और ढिलाई सरकार की मंशा को पलीता लगा रही है। आमजन का कहना है कि अगर एक गरीब व्यक्ति अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए बार-बार गुहार लगाने के बावजूद भी न्याय नहीं पा रहा तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर देख रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कब तक इस मामले में संज्ञान लेकर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई करता है।






























