अनुज कुमार वर्मा
सिद्धि टुडे – उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां प्रदेश से भू-माफियाओं के सफाए का संकल्प दोहरा रहे हैं, वहीं उन्नाव जिले के शुक्लागंज थाना क्षेत्र के बेहटा गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो शासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
आरोप है कि गांव के प्रधान की दबंगई के चलते एक गरीब महिला की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि विवादित भूमि का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद निर्माण कार्य कराए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब मामला कोर्ट में लंबित है, तब किसके संरक्षण में निर्माण कार्य कराया जा रहा है?
मुख्यमंत्री स्वयं भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात करते हैं, लेकिन यदि सत्ता और पद के प्रभाव में गरीबों की जमीनें ही सुरक्षित नहीं रह जाएंगी, तो फिर भू-माफियाओं और दबंगों में अंतर क्या रह जाएगा?
बेहटा गांव का यह मामला प्रशासन की निष्पक्षता और कानून के राज की कसौटी बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी न्यायालय की मर्यादा और एक गरीब महिला के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आते हैं या फिर दबंगई के आगे कानून बौना साबित होता है।
जिस प्रदेश में भू-माफियाओं पर बुलडोजर चलाने की बात होती है, वहां अगर न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर भी कब्जे और निर्माण के आरोप लगें, तो यह केवल एक महिला का नहीं, बल्कि कानून के सम्मान का भी प्रश्न बन जाता है।






























