उन्नाव में जमीन के बैनामे का विवाद बना खूनी रंजिश की वजह! गोली लगने से कन्हैयालाल की मौत, तीन लोगों पर मुकदमा

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सचिन कुमार
ब्यूरो- सिद्धि टुडे,उन्नाव

तीन साल पहले 13 बिस्वा जमीन का छह लाख रुपये में तय हुआ था सौदा; बयाने की रकम, बाकी भुगतान और बैनामे को लेकर बढ़ा विवाद, बेटे की तहरीर पर पुलिस की कार्रवाई

उन्नाव, 25 अक्टूबर। जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरकार एक व्यक्ति की मौत तक पहुंच गया। उन्नाव जिले के सोहरामऊ थाना क्षेत्र के ठकुराईनखेड़ा गांव में 45 वर्षीय कन्हैयालाल को गोली मार दी गई। गंभीर रूप से घायल कन्हैयालाल ने कानपुर के हैलट अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। मृतक के बेटे अमन की तहरीर पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में जमीन के बैनामे, रुपये के लेनदेन और कथित रंजिश को घटना की पृष्ठभूमि बताया जा रहा है।
इस वारदात ने एक बार फिर जमीन के सौदों में पैदा होने वाले विवादों और उनके गंभीर परिणामों पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, घटना के पीछे की वास्तविक वजह और आरोपियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
छह लाख रुपये में तय हुआ था 13 बिस्वा जमीन का सौदा
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ठकुराईनखेड़ा गांव निवासी कन्हैयालाल का अपने चचेरे साले नागेंद्र से जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर विवाद चल रहा था। नागेंद्र लखनऊ जिले के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के मरुई गांव का निवासी बताया गया है।

बताया जाता है कि करीब तीन साल पहले लगभग 13 बिस्वा जमीन का सौदा छह लाख रुपये में तय हुआ था। इस सौदे के लिए एक लाख रुपये बयाने के तौर पर दिए गए थे। शुरुआती सहमति के बाद जमीन का बैनामा नहीं हो सका और धीरे-धीरे दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने लगा।
मृतक के बेटे अमन की शिकायत के मुताबिक, बाद में नागेंद्र ने जमीन खरीदने से इनकार कर दिया। इसके बाद बयाने की रकम वापस करने और जमीन किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने की बात सामने आई।

अमन का आरोप है कि उनके पिता ने एक लाख रुपये वापस कर दिए थे, लेकिन इसके बावजूद जमीन और रुपये को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ। आरोप है कि नागेंद्र जमीन का बैनामा कराने के लिए दबाव बना रहा था।

जमीन के सौदे से शुरू हुआ विवाद किन परिस्थितियों में जानलेवा रंजिश में बदल गया, यह इस मामले की जांच का प्रमुख बिंदु है।
बैनामे को लेकर दबाव और धमकी देने का आरोप
मृतक के बेटे ने पुलिस को दी गई शिकायत में जमीन के विवाद को हमले की वजह बताया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैनामे को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से तनाव था और इस सिलसिले में धमकी भी दी गई थी।
मामले में नागेंद्र के साथ उसके भाई भूपेंद्र उर्फ मोनू और सुशील उर्फ सन्नाम के नाम भी सामने आए हैं। अमन की तहरीर के आधार पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
हालांकि, धमकी दिए जाने, जमीन के बैनामे के लिए दबाव बनाने और हमले की साजिश से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी पुलिस जांच के आधार पर ही की जा सकती है। प्राथमिकी में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध नहीं होता।
आधी रात के करीब हमला, जबड़े में लगी गोली
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार देर रात करीब 12 बजे कन्हैयालाल पर हमला किया गया। आरोप है कि अपाचे मोटरसाइकिल से पहुंचे हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी और मौके से फरार हो गए।

गोली कन्हैयालाल के जबड़े में लगी। अचानक हुई इस वारदात के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल कन्हैयालाल को तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
परिजन पहले उन्हें असोहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां से उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने बेहतर उपचार के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर कर दिया।
हैलट अस्पताल में उपचार के दौरान रविवार सुबह उनकी मौत हो गई। मौत की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया।

बेटे अमन की तहरीर पर तीन लोग नामजद
घटना के बाद मृतक के बेटे अमन ने सोहरामऊ थाना पुलिस को शिकायत दी। इसके आधार पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

नामजद व्यक्तियों में शामिल हैं:
नागेंद्र पुत्र हरिप्रसाद, निवासी मरुई गांव, थाना मोहनलालगंज।
भूपेंद्र उर्फ मोनू, जिसे नागेंद्र का भाई बताया गया है।
सुशील उर्फ सन्नाम।

प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, कन्हैयालाल के घायल होने के बाद शुरुआत में हत्या के प्रयास से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। उपचार के दौरान उनकी मौत हो जाने के बाद हत्या की धारा बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है।
मुकदमे में आगे की कार्रवाई, आरोपियों की भूमिका और घटना में प्रयुक्त हथियार से संबंधित तथ्य पुलिस की जांच पर निर्भर करेंगे।

दो आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर, आधिकारिक पुष्टि जरूरी
घटना से संबंधित एक प्रकाशित समाचार के शीर्षक में दो आरोपियों की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया है। हालांकि, गिरफ्तारी की स्थिति, गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के नाम और पुलिस की आगे की कार्रवाई की स्पष्ट पुष्टि संबंधित पुलिस अधिकारी के आधिकारिक बयान से की जानी चाहिए।

जांच में पुलिस के सामने यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि गोली किसने चलाई, हमले के समय कितने लोग मौजूद थे और जमीन के सौदे को लेकर विवाद की वास्तविक स्थिति क्या थी।
जमीन का सौदा, बयाने की रकम और बैनामा—जांच के केंद्र में तीन अहम सवाल
इस मामले में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ी परिस्थितियां विशेष महत्व रखती हैं। करीब तीन साल पहले छह लाख रुपये में 13 बिस्वा जमीन का सौदा तय होने, एक लाख रुपये बयाने के तौर पर दिए जाने और बाद में भुगतान तथा बैनामे को लेकर विवाद होने की बात सामने आई है।
ऐसे मामलों में यह जानना जरूरी होता है कि सौदे के संबंध में कोई लिखित अनुबंध या रसीद बनाई गई थी या नहीं, बयाने की रकम वापस किए जाने का कोई प्रमाण है या नहीं और जमीन के स्वामित्व तथा बैनामे से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं।
पुलिस जांच में इन तथ्यों के साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध प्रमाण भी महत्वपूर्ण होंगे।

हालांकि, जमीन के सौदे में विवाद होना अपने आप में गोलीबारी या हत्या के आरोप को साबित नहीं करता। दोनों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए जांच में ठोस साक्ष्य जरूरी होंगे।
एक विवाद और परिवार ने खो दिया अपना सदस्य

कन्हैयालाल की मौत के बाद परिवार के सामने अपूरणीय क्षति है। जिस जमीन के सौदे को लेकर विवाद चलने की बात कही जा रही है, उसी विवाद को हमले की वजह बताते हुए परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अब इस मामले में पुलिस जांच की दिशा और सामने आने वाले साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। आरोपियों की गिरफ्तारी, कथित हथियार की बरामदगी, घटना के समय उनकी मौजूदगी और जमीन के सौदे से जुड़े दस्तावेजों की जांच से घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जमीन के बैनामे और रुपये के लेनदेन से जुड़ा कथित विवाद एक व्यक्ति की मौत की घटना से जुड़ गया है। अब जांच में यह स्थापित होना बाकी है कि वारदात को किसने अंजाम दिया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था।