सचिन कुमार
ब्यूरो–सिद्धि टुडे, उन्नाव
उन्नाव। गंगाघाट कोतवाली में तैनात दरोगा विद्यासागर शुक्ला पर दहेज उत्पीड़न से जुड़े पारिवारिक विवाद में समझौते का दबाव बनाने, रुपये मांगने और महिला के घर में घुसकर मारपीट करने के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता परिवार का दावा है कि दरोगा ने महिला को थप्पड़ मारा, उसकी सास के साथ भी मारपीट की और घटना का वीडियो बनाने की कोशिश करने पर मोबाइल फोन तोड़ दिया। वहीं, परिवार के एक सदस्य ने थाने में मारपीट किए जाने और बाद में चालान करने का भी आरोप लगाया है।
मामला शुक्लागंज के कृष्णानगर निवासी अंचल कश्यप के परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, परिवार में दहेज उत्पीड़न का मुकदमा पिछले करीब पांच वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप है कि इसी मुकदमे को लेकर ससुराल पक्ष की ओर से लगातार समझौते का दबाव बनाया जा रहा था। सात अक्टूबर को हुई घटना के संबंध में वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने की बात कही है।
2019 में हुई थी शादी, दहेज उत्पीड़न का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन
अंचल कश्यप के मुताबिक, उनकी बहन निशा कश्यप की शादी वर्ष 2019 में मंशाखेड़ा निवासी रामजी कश्यप से हुई थी। शादी के बाद विवाद होने पर निशा ने अपने पति, ननद और चचेरे सास-ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। अंचल का कहना है कि मामला पिछले करीब पांच वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन है।
परिवार का आरोप है कि मुकदमा वापस लेने और समझौता करने के लिए ससुराल पक्ष की ओर से दबाव बनाया जा रहा था। इसी विवाद के बीच 20 सितंबर 2026 को निशा की सास के घर के बाहर पहुंचने पर विवाद होने की बात कही गई है।
अंचल के अनुसार, इस दौरान मारपीट और गाली-गलौज के आरोप लगाए गए, जिसके बाद पुलिस आपातकालीन नंबर 112 पर शिकायत की गई। परिवार का दावा है कि थाने और आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत की गई, लेकिन उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली।
दोनों पक्षों की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे
अंचल कश्यप के अनुसार, 20 सितंबर को ही निशा की चचेरी सास मूर्ति कश्यप ने गंगाघाट कोतवाली में अंचल, मनीष, अयोध्या और राधा कश्यप के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था।
अंचल का आरोप है कि इसी मामले में सात अक्टूबर को दरोगा विद्यासागर शुक्ला उनके घर पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दरोगा ने उनसे रुपये मांगे और मारपीट की। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर थाने ले जाया गया, जहां भी कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई और चालान कर दिया गया।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दर्ज मुकदमे से संबंधित पुलिस का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
महिला को थप्पड़ मारने और घर में घुसकर तलाशी लेने का आरोप
महिला के मुताबिक, सात अक्टूबर को दरोगा विद्यासागर शुक्ला उनके घर पहुंचे थे। महिला का आरोप है कि उसने वारंट दिखाने और मौके पर महिला कांस्टेबल की मौजूदगी को लेकर सवाल किया तो दरोगा उसे धक्का देते हुए घर के अंदर घुस गए।
महिला के अनुसार, इसके बाद दरोगा ने कमरे में तलाशी लेनी शुरू कर दी। उस समय उसके पति कमरे में खाना खा रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान विवाद बढ़ा और दरोगा ने महिला को थप्पड़ मार दिया। महिला ने गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया है।
महिला का दावा है कि बीच-बचाव करने पहुंची उसकी सास के साथ भी मारपीट की गई। घटना का वीडियो बनाने की कोशिश करने पर मोबाइल फोन तोड़ने का आरोप भी लगाया गया है।
20 हजार रुपये मांगने का आरोप
शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से दरोगा पर 20 हजार रुपये मांगने का भी आरोप लगाया गया है। महिला के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उनसे पूछा कि रुपये का इंतजाम हुआ या नहीं। महिला का दावा है कि रकम का इंतजाम नहीं होने की बात कहने पर उनके साथ गाली-गलौज की गई।
परिवार ने आरोप लगाया है कि रुपये नहीं दे पाने के कारण उन्हें परेशान किया गया। हालांकि, कथित रकम मांगने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में दरोगा का पक्ष और पुलिस विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा
महिला का कहना है कि घटना के बाद उसने थाने में शिकायत दी और अपनी बात रखने के लिए तीन बार चक्कर लगाए। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक को भी प्रार्थनापत्र देने की बात कही गई है।
परिवार का आरोप है कि शिकायत के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला। अब वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है और संबंधित पुलिसकर्मी की भूमिका की जांच की मांग उठ रही है।
वीडियो सामने आने के बाद जांच पर निगाहें
मामले से संबंधित वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने प्रकरण का संज्ञान लेकर जांच कराने की बात कही है। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दरोगा किस आधार पर महिला के घर पहुंचे थे, तलाशी लेने की परिस्थितियां क्या थीं और मारपीट, रुपये मांगने तथा मोबाइल तोड़ने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
इसके साथ ही, दोनों पक्षों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों, दहेज उत्पीड़न के मुकदमे और सात अक्टूबर की घटना से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।































